सोमवार, 15 नवंबर 2010
अरमा अंसारी
बिल्कीश का हुश्न लिए मलिका ऐ जहाँ |
खुबसूरत सी कब्र मैं आराम फरमा हें यहाँ |
जन्नत का गुलशन दिलकश ये मकां |
अरमा अंसारी
नई पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)