बुधवार, 1 अगस्त 2012

आज़ादी क्या है

  मैने  अपनी सारी  ज़िन्दगी इसी  शहर में बितायी  ।  इन 20  सालों मैं  इसे  झुकते गिरते ,संभलते हसते, और कई सारी  बार रोते देखा है । इतने सारे सालों मै अगर कुछ  नहीं  बदला । तो  इस शहर से  प्यार, मेरा  इसके  बेह्तर   मैं विश्वास, इन कई सालों से  सैलाब का गुज़रना और उम्मीद की रोशनी का फिर मुस्कुराना ।गुजरात में नियत है ,पर वो बार बार डर  के सामने झुकती घिसती  नज़र आती है । पर ये भाव विरेचन का समय काल चल रहा है । इससे  गुज़र कर गुजरात सर उठाकर एक नयी शुरुआत करेगी ।जहाँ हर किसी की  आवाज़ बुलंद होगी  । और सब अपने मन के सरताज  होंगे ।
  कभी कभी सोचती  हूँ ,जब ये मन  कुछ पलों के लिए सहम जाता है ।अपने विश्वास पर संदेह करता है । कि शायद मैं ग़लत  हूँ । पर ये लोग तो  ग़लत नहीं। ये कोई गुनाहगार ,कोई  अपराधी नहीं ,तो ये  मैं क्यूँ जले । जब  दुःख  की  जलती रोशनी नज़र नहीं आती , मैं अपने मन पर फिर विश्वास करने लगती हूँ । इनके लिए एक बेहतर कल की  उम्मीद करती हूँ । अपने लिए एक बेहतर कल की उम्मीद करती हूँ ।
 आज़ादी क्या है ? अनेक  इंसानों  के लिए इसके अनेक  है । कोई इसे अपनी कला में , तो कोई अपने कपड़ों में, कोई रहने के ढंग में, तो कोई जीने के रंग में  देखता है ।किसी के लिए ये आवाज़ तो किसी के लिए अंदाज़ है ।में बीएस इतना सोचती हूँ ,कि  आज़ादी एक  और सुखी और स्वास्थ्य जीवन हैं । जहाँ न डर  का कोहरा है । न महंगाई का पहरा जहाँ इन्साफ हो ।
  माँ कहा करती थी ,सुन्दरता जीवन में है ,तो आस पास को सुंदर मन अपने आप बना लेता है । इंसान को विशालकाय  इमारतों की  नही कोई बाग़  बगीचा उसे  नहीं कर सकता , जब तक की वो मन से  नहीं विकाश शायद सीमेंट की  में नहीं , पर  आम  की बेसिक जरूरतों में है ।  घर  स्वचछ इलाका , पानी  और स्वास्थय  में है । एक साचार समाज में है ।
   लोकतंत्र इस शब्द का मूल ही लोग है ।जनता है ,इन्ही आजादियों से ही ये शब्द बनता है ।रात के अंधेरों मई राहत  देती चाँद की रोशनी भी तो उम्मीद  के सूरज से है ।कल रोशन होगा ,अपने हकों के उजालों से ना की डर  के परों तले दबी समझोते से , लोग उपर उठ कर इस प्रदेश को चलायेंगे अपने हकों के बालों से नयी दुनियां बनायेगे ।