बारिश में घर याद घर आ रहा है
कच्चे आमों का आचार याद आ रहा है
पके आमों ख़ुश्बू याद आ रही है
भुट्टा भुनने की आवाज़ आ रही है
खिड़की से आने वाली बारिश की बौछार याद आ रही है
बारिश के दिनों का सन्नाटा याद आ रहा है
सन्नाटे में लोगो का गुनगुनाना याद आ रहा है
दो बजे की अज़ान याद आ रही है
कव्वों की आवाज़ याद आ रही है
बया का घोंसला याद आ रहा है
ज़ख़्मी ( तोता ) पट्टू लाला याद आ रहा है
छत से टपकता पानी याद आ रहा है
हवाओं की सुर याद आ रही है
पत्तों का सिमट जाना याद आ रहा है
गेंहूँ की खनकती बालिया याद आ रही है
नीलगाय का डर कर भागना याद आ रहा है
बारिश में आँख बंद कर के सायकिल चलाना
और फिर किसी खाई में गिर जाना याद आ रहा है
नदी में पत्थर फेंकना याद आ रहा है
और अम्मी के हाथों से बनाये शामी कबाब और गलौटी कबाब याद आ रहें है