शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019

दीवारें कुछ कहना चाहती है

मेरे घर की दीवारें सुकबुका रही है कुछ कहना चाहती है, इन दीवारों पर अलग अलग चित्र बने दिखाई देते है कभी कुत्ता कभी बिल्ली कभी इंसान बिल्कुल उसी तरह जब चाँद पर आंखें गड़ाये देखते रहो ऐसा मालूम होता है, कोई लालटेन लिए अपने सपनों का  ढूंढने निकल रहा हो
अलग अलग किरदार मालूम होते है , इन दीवारों पर दरारें पड़ रही है, जैसे कोई झीलों की क़तार हो समंदर सी गहराई मालूम होती है, दीवार से पुता  हुआ चुना गिर रहा है,  दीवारों के सटीक खुदाई चल रही है वह खुदाई कोई और नहीं बल्कि चीटियां कर रहीं हैं , दीवारों से गिरा चुना चीटियों की मिट्टी में जा मिला है. चीटियां बेतहाशा हो कर अपना घर छोड़ रही है. फिर कोई कीड़े मकोड़े अपना आशियाना न बना लें