सर्दियों की रात में अक्सर शाम होते सन्नाटा पसरने लग जाता है, ठण्ड की वजह से लोग जल्दी सो जाते है, या कुछ काम कार रहें होते है, इन्ही सन्नाटों के बीच घनघोर कोहरा, आसमान के नीचे धुंधली चादर सा दिखाई दे रहा था और काली रात में चार मंज़िलों पर रौशनी भी कोहरे के वजह से धुंधली सी थी बालकनी पर टंगे परदे ठण्डी हवा से टकरा कर आवारों की तरह झूम रहें थे पास में लगे पेड़ों की टहनियां भी कोहरे से भीगी हुई शरमाई शरमाई सी झूम रही थी, लैंप की रंगीन बत्ती को बरामदे के टंगे परदे उन्हें बार बार छुपा रहे थे, गली के कुत्ते दीवारों के बल उठते बैठते अपनी जगह तलाश रहे थे दूसरे छोर पर मूंगफली वाला मूंगफली बेच रहा था, सायकिल पर मूंगफली की बोरी बांधे और हैंडल पर तराज़ू लटकाये चिल्लाते हुए आगे बढ़ रहा था मूंगफली के शौकीन निकल कर मूंगफली भी खरीद रहें थे।