जब आप ख़ामोशी के साथ होते है, तो आप सिर्फ यही ख़्याल रखते हैं आगे करना क्या है ज़िन्दगी को सही ट्रैक पर कैसे लाया जाए, हाथ में सिर्फ नौ से छः वाली नौकरी और लम्बी यात्रा और, और उस यात्रा के साथ कोई बेनिफिट्स नहीं यात्रा का पैसा ऊपर से ख़र्च चाहे गाडी का पेट्रोल हो या फिर मेट्रो कार्ड या ऑटो का पैसे की लागत ऊपर से समय का ख़र्च भी साथ चला गया, दोस्त और रिश्तेदार से भी मिलना नहीं हो पाता, परिवार के साथ समय भी नहीं दे पाते एक इतवार में कपड़े की धुलाई और साफ सफाई में निकल जाता है, और महीने की आमदनी पच्चीस हज़ार से चालीस हज़ार तक रह जाती है, एक तरह से ऐसी ज़िन्दगी बहुत उबाऊ है, ना समय की बचत ना पैसे की बचत महीने भर की तारीख में खाता भी खाली हो जाता है कभी-कभी बिमारी आयी तो कर्ज़दार भी हो गए, ज़िन्दगी इन्हीं के बीच है और इनके बीच फसा है इंसान।
दफ्तर के बाहर रेढ़ी फेरी और ठेले वाले कॉर्पोरेट जॉब से अच्छा कमा रहे है, दो घंटे ढेला लगाया लंच ब्रेक में खूब कमाया, फिर चार बजे तक घर का काम भी कर लिया परिवार के साथ भी है दो काम ना यात्रा ना समय की बर्बादी और ऊपर उनका अपना रोज़गार फल फूल रहा है, छोटा बिज़नेस कमाल का बिज़नेस है ना काम की बात