मेरे घर में परिंदे भी है जानवर भी
घर के बड़े बूढ़े जानवर पालने का बड़ा शौक रखतें हैं
घर में पेड़ों की बहार है बहारों पर फूलों का गुच्छा
गुच्छों पर तितलियों का मंडराना
और मैं उन दोनों को निहार रहा था दूर के बरामदे में बैठे
वह जो घर का बूढ़ा आदमी सुबह अपनी छड़ी ले कर पेड़ों के पास रोज़ाना बैठता था
काफी अच्छा रिश्ता था दोनों के बीच यानी पेड़ और बूढ़ा इंसान रोज़ाना पेड़ों को पानी भी वही देते
घर में और भी पालतू जानवर थे वह तो घर भर में चक्कर लगते
जो जयदा प्यार करता उसी के पास जा कर बैठ जाते
लेकिन उन्हें प्यारे जानवरों को पता था घर का मालिक उनका सबसे अच्छा दोस्त है
मेरा घर का कुत्ता बड़ा वफ़ादार, जाने कितने कुत्ते आये बड़े नाम रखे
किसी का मोती शेर किसी का टाइगर, घर का आधा परिवार था
बड़े नखरे थे, बैठने का अंदाज़ ही अलग था उसका
अक्सर खिड़की के पास बैठ कर आते जाते सबको देखता
घर में कोई भी नया इंसान आता तुरंत पता चल जाता कोई बेल की ज़रुरत नहीं
कभी कभी लगता है इनका रहना हमारे आपपास अच्छा लगता है
इन जानवरों की ज़रुरत हमें भी है, जानवरों को भी है
ये हैं तो सदियों का साथ है हमारे दिल का हिस्सा हमारे दिल का पहरा
लाखों मेहरबां हुए जाने कितने दिल इन जानवरों पर , वरना जाने कितनों के घर वीरान है इन जानवरों के बिना
और संसार वीरान है हवा पानी और परिदों के बिना हम सब की ज़िन्दगी कलरफुल है इन्ही लोगो के साथ