बुधवार, 5 मई 2021

मेरे घर में परिंदे भी है जानवर भी

मेरे घर में परिंदे भी है जानवर भी 

घर के बड़े बूढ़े जानवर पालने  का बड़ा शौक रखतें हैं 

घर में पेड़ों की बहार है बहारों पर फूलों का गुच्छा 

गुच्छों पर तितलियों का मंडराना 

और मैं  उन दोनों को निहार रहा था दूर के बरामदे में  बैठे 

वह जो घर का बूढ़ा आदमी सुबह अपनी छड़ी ले कर पेड़ों के पास रोज़ाना बैठता था 

काफी अच्छा रिश्ता था दोनों के बीच यानी पेड़ और बूढ़ा इंसान रोज़ाना पेड़ों को पानी भी वही देते 

घर में और भी पालतू जानवर थे वह तो घर भर में चक्कर लगते 

जो जयदा प्यार करता उसी के पास जा कर बैठ जाते 

लेकिन उन्हें प्यारे जानवरों को पता था घर का मालिक उनका सबसे अच्छा दोस्त है 

मेरा घर का कुत्ता बड़ा वफ़ादार, जाने कितने कुत्ते आये बड़े नाम रखे 

किसी का मोती शेर किसी का टाइगर, घर का आधा परिवार था 

बड़े नखरे थे, बैठने का अंदाज़ ही अलग था उसका 

अक्सर खिड़की  के पास बैठ कर आते जाते सबको देखता 

घर में कोई भी नया इंसान आता तुरंत पता चल जाता कोई बेल की ज़रुरत नहीं 

कभी कभी लगता है इनका रहना हमारे आपपास अच्छा लगता है 

इन जानवरों की ज़रुरत हमें भी है,  जानवरों को भी है 

ये हैं तो सदियों का साथ है हमारे दिल का हिस्सा हमारे दिल का पहरा 

लाखों मेहरबां हुए जाने कितने दिल इन जानवरों पर , वरना जाने कितनों के घर वीरान है इन जानवरों के बिना 

और संसार वीरान है हवा पानी और परिदों के बिना हम सब की ज़िन्दगी कलरफुल है इन्ही लोगो के साथ 

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