बुधवार, 27 जुलाई 2022

किताबें अच्छी दोस्त है


हम सब की दोस्त है किताबें    

मेरी प्यारी दोस्त किताबें 

ज्ञान की कुंजी हैं ये किताबें 

घर की आधे हिस्से में रहने वाली किताबें

दिल की मज़बूत पहेली हैं ये किताबें 

हर सवाल का जवाब हैं ये किताबें 

हर मुद्दों पर बेबाक हैं ये किताबें 

 किसी की गिरफ़्त में नहीं हैं ये किताबें 

मेरे सफ़र में हमसफ़र हैं ये किताबें 

मेरे ज़हन में उथल-पुथल मचाती  हैं ये किताबें 

लेकिन रहती बड़ी  ख़ामोश  हैं ये किताबें 

सबकी प्यारी दोस्त हैं ये किताबें   

सबका मन बहलाती हैं ये किताबें  

सबके बारे में बताती हैं ये किताबें  

जाने कितने रिश्तों को निभाती हैं ये किताबें 

जाने कितनी पीढ़ियां और इतिहास को बदलते देखा 

अब हमसे उनके बारे में बतलाती हैं ये किताबें  

बड़ी कामकाजी किताबें बच्चों और बड़ों को समझदारी का पाठ पढ़ाती हैं ये किताबें 

कुर्सी  पर ज़रा सा हाथ में लेकर बैठ गया 

उठने नहीं देती हैं ये किताबें 

हाथों को थामें रहती हैं ये किताबें 

कभी बोर नहीं  होने देती हैं ये किताबें 

दिलों और दिमाग पर राज करती हैं ये किताबें   

दूर दुनिया का हवाला बताती हैं ये किताबें 

तानाशाहों का इतिहास बताती हैं ये किताबें 

हर मुद्दों पर छप जाती हैं ये किताबें 

ग़लत को सही राह  दिखाती हैं ये किताबें 

इंटरनेट की ऑनलाइन पर छा गई ये किताबें 

मुझे मेरे घर की किताबें देख कर राहत मिलती है 

ये किताबें मेरी अच्छी दोस्त है 

एक कप चाय की प्याली की चुस्की के साथ वाली किताबें मेरी दोस्त है 

आंखों में नींद में आते ही मेरे चेहरे को ढक कर सो जाती ये किताबें 

सारे दर्द को दूर रख कर मेरे दिल को थाम लेती ये किताबें 

भला इनसे बेहतर कौन  समझ पाया मुझे 

इनकी खुशबू मोह लेती है मुझे 

मेरी लाइब्रेरी मेरे घर का एक हिस्सा मेरी किताबें 

लेकिन मेरी घर की कुछ तोहफें से मिली किताबें, कुछ ख़रीदी  मेरी दादी नानी की किताबें 

किताबें हैं लकड़ी की बनी लाइब्रेरी और मकड़ी के जालों के बीच  इर्दगिर्द रखी किताबें 

मकड़ी की भी अच्छी दोस्त किताबें अक्सर बुन  लेती है अपना डिजाइन वाला ताना बाना 

हिन्दुस्तान से  ले कर सारे संसार  किताबें 

हम सब की दोस्त है किताबें    

मेरी प्यारी दोस्त किताबें 



अरमा नफीसा अंसारी 

शुक्रवार, 22 जुलाई 2022

मेरे हिस्से के लफ्ज़

मुझे कुछ याद नहीं ...

समझ नहीं आ रहा क्या लिखा जाए, बड़े दिन बाद जो बैठी हूँ लिखने कुछ याद तो नहीं 

सोचती हूँ क्या करू किसके बारे में लिखू थोड़ा सा इश्क थोड़ी सी ख़ामोशी थोड़ी सी शरारत 

फरमान है कि- की उलझनों ने लफ़्ज़ों को कैद कर लिया है ! ऐसे जैसे उनके आने की रुकावट हो 

मैं परेशान हूँ... क्या हुआ मुझे, मुझे कुछ याद क्यों नहीं आ रहा! खूबसूरत लफ़्ज़ों को पिरोऊँ कैसे 

अपने इस नए साल के हवाले कैसे करूँ 

मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा...

सब बंद खिड़की और दरवाज़ों की तरह कैद हो गए 

जैसे कभी कुछ लिखा ही नहीं 

मेरे हिस्से के लफ्ज़ कहाँ चले गए 

वह मेरे हिस्से की रौशनी थी 

चमचमाती रात के सितारे थे मेरे लफ्ज़ 

भला मुझे कुछ याद क्यों नहीं 

और मुझे ये याद क्यों नहीं आ रहें है 

शायद उलझनों की कड़वाहट मेरे लफ़्ज़ों को दूर कर गई 

मुझे सुकून देने का रास्ता मेरी लिखावट थी 

मेरी परेशानी में वह हमदम साथ थे 

और मैं  लफ़्ज़ों को गुनगुनाती थी 

मुझे कुछ याद नहीं .... 

या रब माफ़ करना मुझे 

में थोड़ी ज़िद्दी और कभी कभी नाराज़गी जताई 

लेकिन लफ़्ज़ों को हमेशा अपने दिल में रखा 

अब क्या हुआ शायद मैंने ख़ामोशी से रहना बंद कर दिया 

अरसे से उनसे नए ज़माने की बात नहीं की 

मेरे हिस्से के लफ्ज़ मेरी दुनिया है 

इनको हमेशा डायरी के हवाले किया 

मेरी क़लम ने  इन लफ़्ज़ों से ही मैंने इश्क़ किया 

इनके बिना मेरा दिन नहीं गुज़रता 

शाम मानो अधूरी है तुम्हारे बिना 

मेरे लफ़्ज़ों के बिना...

फिर से, ज़हन और दिमाग में उतारूंगी 

फिर वही बारिश वाली शाम का हवाला लिखूं गी 

मंदिर में मिली पंजीरी प्रसाद से स्कूल का २६ जनवरी का ड्रामा लिखूंगी  

दोपहर वाली ज़ोहर की अज़ान लिखूं गी 

और लिखूंगी बचपन के क़िस्से कहानियां 

फिर से उन लफ़्ज़ों को क़लम के हवाले उतारूंगी 

फिर क़लम और अल्फ़ाज़ों से होगा इश्क़ 

और मेरी डायरी संभाले गी इनके दस्तूरों को 

इनकी खुशबू महकेगी बाग़ों में, समंदर की लहरों की तरह मचलेगी जब क़लम 

कभी हिरणी की तरह कभी तितली की तरह 

डायरी पर जादुई अल्फ़ाज़ों  से बिखेरेंगी अपना याराना 

बस मेरे हिस्से के लफ्ज़ वापिस आ जाए 


अरमा नफीसा अंसारी 

मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

 अगर इतिहास में कोई लीडर मुझे पसंद है वह है ग्रेट लीडर और दुनिआ में सबसे  महान प्रेजिडेंट अब्राहम लिंकन हालाँकि इतिहास मेरी सब्जेक्ट नहीं रही लेकिन मेरी पसंदीदा ज़रूर रही मैंने जितना इतिहास पढ़ा, मुझे अब्राहम लिंकन के बारे में जानना उनसे जुडी बातें और ज्यादा हासिल करना सब लगा रहा जब अब्राहाब लिंकन छोटे थे तो अमेरिका में स्लेवरी का मुद्दा काफी ज्यादा था अब्राहम लिंकन  बहुत परेशानी से पले बढ़े और इन्होने ज़िन्दगी को बहुत बारीकी से देखा और समझा 

रविवार, 13 फ़रवरी 2022

 इंसानियत से बेहतर कोई  विचार नहीं, दिल से ख़ूबसूरत कोई ख़ूबसूरती नहीं और दिमाग से बड़ा कोई दौलत वाला नहीं  



अरमा