साल गए, बीत गए, बात गई । लेकिन यादों का सिलसिला अभी भी जारी है , भला उन्हें कौन भुलाना चाहेगा , मन मुस्कुराता है , मुस्कुरा कर फिर यही बोलता हैं ये कमबख्त मन "दोस्त" दोस्तों की यादें टीचर्स , टीचर्स की बातें । और भी बहुत कुछ, अरे हाँ मै तो कहना ही भूल गई जिसकी बात करने जा रही थी ।
बात दरअसल २०११ की है ।जब हम सभी दोस्त जहांगीराबाद मीडिया इंस्टिट्यूट पढ़ रहे थे । काफी ठण्ड थी वह भी उत्तर प्रदेश की ठण्ड, क्या कहना कितने भी कपडे पहन लो । ठण्ड भागने का नाम ही नही लेती मुह में गमछा लपेट लो फिर भी मुह से भाप निकलती हैं , आग जला कर बैठे रहे, उठने का मन ही नही करता , मेरे सभी दोस्तों को फोटोग्राफी का बड़ा शॊक था । जाने कब निकल जाये पता नही सुबह शाम, बारिश और फिर ठण्ड अच्छा मौसम था , उस वक़्त धान की फसल की शुरुआत हो जाती हैं सभी अपने अपने खेत में बीयोर लगाना शुरू कर देते हैं । जे एम् आई के पास ही काफी बड़ा मैदान, आम के बगीचे । उसी के पास पुराना स्कूल था । और पास में ही बड़ी बड़ी सारंस पंखो को फड़फडाते हुए आवाज़ करते हुए कितना अच्छा लगता था । ये सब देख कभी भी मन बोर नही होता था ,खेत में काम करते लोग और चरवाह । भाई क्या कहना इस मौसम का तो जवाब नही हल्क़े - हल्क़े ओले पड़ रहे थे । अब जब ठान ही लिया हैं । कि फोटोग्राफी करनी हैं तो करनी हैं ,निकल पड़े हम सारे दोस्त फोटोग्राफी के लिए , शाम के ४ बज गए, पता ही नही चला ठण्ड तो थी ही, हवाएं भी चल रही थी । अब चाय पीने का मन कर रहा था । जाये भी तो कहाँ , पास में ही एक गाँव था । लेकिन हम किसी को जानते नही थे । गाँव के पास बच्चे ताप रहे थे ,हम जा कर उनसे बात करने लगे। धीरे धीरे बात आगे बढ़ी और आंटी ने सामने से प्रस्ताव रखा चलो हमारे घर नही चलो गे चाय पी लो ठण्ड बहुत हैं । लो जी हो गई मन की बात फिर क्या था । न तो नही कर सकते अब हाँ भी नहीं कर सकते । दोस्त ने कहा नही- नही आंटी हम जा ही रहे हैं । हमें कुछ काम हैं । आंटी बोली - तो क्या हमारे गाँव नही चलोगे देखो आप लोग चाय भी पी लो फोटोग्राफी भी कर लेना । तो ठीक हैं आप कह रही हैं तो चलो । और हम सब उनके साथ उनके घर गए ।
चाय पी और उनके परिवार वालों से मिले अच्छा लगा । ये वही फोटो हैं । जब सब फोटोग्राफी के लए निकले थे । यहाँ एक आदमी अकेला बैठ कर ताप रहा था । और दूर खड़े हैं सारे दोस्त बातें करते हुए जा रहे थे । ये फोटो उस जगह की उस वक़्त की आज भी याद दिलाती है !!
बात दरअसल २०११ की है ।जब हम सभी दोस्त जहांगीराबाद मीडिया इंस्टिट्यूट पढ़ रहे थे । काफी ठण्ड थी वह भी उत्तर प्रदेश की ठण्ड, क्या कहना कितने भी कपडे पहन लो । ठण्ड भागने का नाम ही नही लेती मुह में गमछा लपेट लो फिर भी मुह से भाप निकलती हैं , आग जला कर बैठे रहे, उठने का मन ही नही करता , मेरे सभी दोस्तों को फोटोग्राफी का बड़ा शॊक था । जाने कब निकल जाये पता नही सुबह शाम, बारिश और फिर ठण्ड अच्छा मौसम था , उस वक़्त धान की फसल की शुरुआत हो जाती हैं सभी अपने अपने खेत में बीयोर लगाना शुरू कर देते हैं । जे एम् आई के पास ही काफी बड़ा मैदान, आम के बगीचे । उसी के पास पुराना स्कूल था । और पास में ही बड़ी बड़ी सारंस पंखो को फड़फडाते हुए आवाज़ करते हुए कितना अच्छा लगता था । ये सब देख कभी भी मन बोर नही होता था ,खेत में काम करते लोग और चरवाह । भाई क्या कहना इस मौसम का तो जवाब नही हल्क़े - हल्क़े ओले पड़ रहे थे । अब जब ठान ही लिया हैं । कि फोटोग्राफी करनी हैं तो करनी हैं ,निकल पड़े हम सारे दोस्त फोटोग्राफी के लिए , शाम के ४ बज गए, पता ही नही चला ठण्ड तो थी ही, हवाएं भी चल रही थी । अब चाय पीने का मन कर रहा था । जाये भी तो कहाँ , पास में ही एक गाँव था । लेकिन हम किसी को जानते नही थे । गाँव के पास बच्चे ताप रहे थे ,हम जा कर उनसे बात करने लगे। धीरे धीरे बात आगे बढ़ी और आंटी ने सामने से प्रस्ताव रखा चलो हमारे घर नही चलो गे चाय पी लो ठण्ड बहुत हैं । लो जी हो गई मन की बात फिर क्या था । न तो नही कर सकते अब हाँ भी नहीं कर सकते । दोस्त ने कहा नही- नही आंटी हम जा ही रहे हैं । हमें कुछ काम हैं । आंटी बोली - तो क्या हमारे गाँव नही चलोगे देखो आप लोग चाय भी पी लो फोटोग्राफी भी कर लेना । तो ठीक हैं आप कह रही हैं तो चलो । और हम सब उनके साथ उनके घर गए ।
चाय पी और उनके परिवार वालों से मिले अच्छा लगा । ये वही फोटो हैं । जब सब फोटोग्राफी के लए निकले थे । यहाँ एक आदमी अकेला बैठ कर ताप रहा था । और दूर खड़े हैं सारे दोस्त बातें करते हुए जा रहे थे । ये फोटो उस जगह की उस वक़्त की आज भी याद दिलाती है !!
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| जहांगीराबाद |

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