शनिवार, 8 नवंबर 2014

बस्ती

 बस्ती की वो पुरानी तंग  गालिया वही पुरानी परंपरा किसी के किवाड़ के सामने बकरी मिम्मना रही हैं एक दरजी खटखटखट  मशीन चला रहा हैं , दो कुत्ते कसाई की दुकान के सामने खड़े हो कर एक गोश्त के टुकड़े के लिए त्योरी चढ़ा-चढ़ा कर  आपस में लड़ रहे हैं, अबे तूने बेईमानी क्यों की खेल खेल में  बच्चों के बीच तू तू मैं मैं चल रही हैं, बूढी औरत दरवाज़े की देहरी पर बैठी हैं, रास्ते में आते जाते लोगो को घूर घूर कर देख रही हैं ,  दूसरी मंज़िला से एक साहिबा सब्जी वाले को डोरी में बांध कर सब्जी की टोकरी दे रही हैं, सब्जी वाला ज़ोर ज़ोर से  चिल्ला रहा हैं , आलू  चालीस रूपये किलो पालक तीस रूपये किलो, नीचे लड़का  पानी की छींटे दे दे कर गाड़ी  की सफाई कर रहा हैं    

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