खुदा न ख़ास्ता मौसम रूठ गया तो ये फ़िज़ाएं मुसाफ़िर बन जाएंगी फिर खुदा से शिक़ायत ना करियेगा ज़िन्दगी ताकिया-ऐ -कलाम है, ये वह लफ्ज़ के टुकड़े है जहाँ पैग़ाम है मुहब्बत लोगो की ज़िन्दगी की ज़रुरत है कई वरक़ों का फलसफ़ा रंगीन इंक से लबरेज़ है
अरमा नफीसा
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