शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

 रमजान का महीना है ऐसे वक़्त में लखनऊ और बाराबंकी की याद आती है कितना भी मन बहलाने के लिए बाटला  हाउस और पुरानी  दिल्ली घूम लो वोह बात नहीं है जो लखनऊ के शहर अमीनाबाद में है  लेकिन लखनऊ भी काफी बदल चूका है वह १५ साल पहले वाले उर्दू लफ्ज़ सुनाई नहीं देते मेरे नाना बताते हैं जब वह तिब्बिया कॉलेज में पढ़ते थे चौक अक्सर टुंडे कबाब खाने जाया करते थे  उस दौर के लफ्ज़ आज भी कानो में गूंजते हैं जब उसे बोलते थे लखनवीं ज़ुबां 

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