गुरुवार, 23 जनवरी 2014

तू भी एक इंसान बन

तू यूँ ही ना सवाल करना किसी कि ज़िन्दगी पे वार कर
तू एक इंसान बन तू एक इंसान बन
बना सके तो एक अच्छा जहाँ बना
जहाँ हो बस एकता जहाँ खूबसूरत ख्वाब् हो हर किसी के खवाब हो 
खिले भी फूल भी वहाँ जहाँ न हो रंग भेद भाव का न हो भेद जाति- पाति का 
जहाँ खिले फूल हर रंग के वोह बाग़ भी खुशी के संग झूमती रहे 
न बाँध उन ज़ालिमो की ज़ंजीरों से हमारे इन बुलंद सपनो को न कर किसी के सपनो कि हत्या न कुचले जाए किसी के घर न किसी माँ कि सुनी हो गोदन मंच पर ग़लत सवाल कर न लोगो को गुमराह करबहुत हुआ बहुत हुआ ?उठे हाथ इन्साफ के लिए चले क़लम इन्साफ के लिएएक खूबसूरत जहाँ हम बनाएंगेजहाँ हर किसी को इन्साफ मिलेजहाँ क़तार बे क़तार हो न मंदिर - मस्ज़िद का सवाल हो न चर्च का सवाल होमहफिलों में भी जहाँ सवालिया मिज़ाज़ हो !लफ्ज़ को सहेज कर किताब को हसीं कर 
न तू खुदगर्ज़ बन न तू हैवान बन
तू भी एक इंसान बन तू भी एक इंसान बन

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