उलझने हमेशा उलझनों को जन्म देती
कमबख़्त ये समझती कहां है
चुनांचा इनसे इनका ज़िक्र करना लाज़मी है
अपने लफ़्ज़ों में सफ़ेद कागज़ पर
अरमा
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